मंगलवार, 3 जून 2025

वृंदावन की प्यास

यमुना तीर बिछी चंद्रिका, मन बिछोहिनी राधिका।  
मुरलिया बिन सूनो बन, कैसे कटे निसि आधिका?  
कहाँ गए गिरिधर नागर, छोड़ि ब्रज की बाँधिका?  

कोकिल कूक सुनावत है, पिक पंचम स्वर गावत है।  
पवन झूलावत कुंज गली, पर तुम बिन सब सूनो है।  
मधुबन की छाँह रुचिराई, पर दृष्टि तुम्हारी छबि छाई।  
बिनु नंदलाल पलक न सोई, हृदय धड़कन बन गई राई।  

गोपिका संग खेलत बनमाली, मोहन मुरली तान सुहावनी।  
राधे की पगछाप सुनि आए, चलत चतुराई चितचोर धनी।
पर आज काहे न आए श्याम? सखी सब पूछत नाम-नाम।  
नैनन के तीर चलत बयार, पिया बिन बेदन अधिका।  

यमुना तीर बिछी चंद्रिका, मन बिछोहिनी राधिका...


- पं. भारमल गर्ग "विलक्षण"

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