शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025

श्री हनुमान चमत्कारी स्तोत्र




जय सूर्यमुखी हनुमान, ज्योति अमर अविनाश।  
कानीवाड़ा धाम तव, चमत्कार अति विशेष॥  
संगमरमर शिला से, निर्मित मंदिर विराज।  
छत विहीन छाया तव, नभ तलक सदा साथ॥  

पंच शताब्दी पूर्व, प्रगटे स्वयं बजरंग।  
पद्मासन ध्यानमग्न, तेजःपुंज दिव्य अंग॥  
दीवार उठी मूर्ति चढ़ी, रहस्य यह अद्भुत।  
भक्तजन के संकट हर, बालाजी महाबल॥  

वन मध्ये निर्जन था, अब विशाल धाम।  
छत रचना जद्यपि करो, टूट जाय समीर॥  
वायु वेग, तूफान सब, नत शीश करें आज।  
खुले गगन तले तव, कृपा-वृष्टि अमृत धार॥  

तेरह ज्योति अखंड ज्वलै, भक्ति का प्रतीक।  
मनोकामना पूर्ण होत, ज्योति बढ़े अनेक॥  
निराश्रित को संतान दें, वरदान तव दयाल।  
चरण रज लागत जो, तन-मन हो निर्मल॥  

गर्गवंशी पुजारी की , पूजा में प्रेम सार,  
गर्गाचार्य तपस्या की, यहाँ बहती है धार।  
जाति-भेद विहीन यहाँ, सबको सम दृष्टि।  
हनुमान प्रभु की महिमा, करे संकट मुक्त॥  
 
यदुकुल गुरु तपस्वी, वसुदेव हृदयेश।  
गोकुल से चलकर आए, ज्ञान-भक्ति विशेष॥  
परंपरा अखंड यहाँ, पूजा नित्य होत।  
अर्चक वंशज तव, सेवा में सदा रत॥  

आते भक्त दर्शन को, बन जाते दीवान।  
बालाजी चरणों में, अर्पित सब समान॥  
सिंदूर-तेल चढ़ावन, मनोबंधन टूट।  
हनुमान कृपा से हर, संताप सब छूट॥  

चमत्कार सागर यह, पावन तीर्थ धाम।  
रामभक्त की कीर्ति यह, जग विख्यात नाम॥  
जय हनुमान बोलो, नभ धरा गूँज उठे।  
कानीवाड़ा महिमा, जगत भर में फूटे॥  

सूर्यमुखी स्वरूप तव, तेज प्रकाशमान।  
खुले नभ की छत्रछाय, करे सब कल्याण॥  
डुबकी लगाओ भक्ति में, श्रद्धा सहित मन।  
पाप-ताप सब नष्ट हो, बचे प्रेम अखंड॥  

जय हो हनुमान प्रभु, जय चमत्कारी स्थान।  
कानीवाड़ा गाथा यह, हो अमर अविचल॥  
दर्शन मात्र से पावन, हो जाये अंतर।  
हनुमान चालीसा गाव, मुक्ति पाए संसार॥  


• भारमल गर्ग "विलक्षण"
• सांचौर राजस्थान (३४३०४१)



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