शुक्रवार, 20 जून 2025

नव जीवन में गीत लिखो

उषा की अरुण चुनरी छाई  
तिमिर के तंत्र टूटे सारे   
मुरझाए स्वप्न फिर से जागे   
नव जीवन में गीत लिखो! 
  
विषाद की लहरें ठहरीं 
हृदय के शुष्क मरु थरके 
सुख-स्रोत बह उठे अब वहाँ  
नव जीवन में गीत लिखो! 

पुराने पात गिरे धरती   
नव कोपलों का हार खिला  
बंधन टूटे, पंख पसारे   
नव जीवन में गीत लिखो!

गगन में अनहद नाद गूँजा  
तिमिर का दीप जला अमर   
संघर्ष के पथ पर विजय ध्वजा 
नव जीवन में गीत लिखो!  

वेदना सिंधु पार उतरे 
ज्ञान ज्योति भरी नयन में 
मृत्यु के विष में अमृत फूटा  
नव जीवन में गीत लिखो 

- भारमल गर्ग "विलक्षण"

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